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योग-दर्शन तथा साधना की हिन्दी पत्रिका

योगापीस संस्थान · जयपुर


योग के विषय में आज अनेक स्वर तथा अगणित दावे प्रचलित हैं। ऐसे समय में योग आनंदम् का एकमात्र प्रयोजन है —
योग-विद्या को उसके मूल, प्रामाणिक तथा सम्पूर्ण रूप में आप तक पहुँचाना।

“योग आनंदम् शिक्षा का माध्यम है, खण्डन का नहीं।”
प्रथम

योग — पूर्ण लक्ष्य

योग यहाँ देह-साधन मात्र नहीं, अपितु अपने पूर्ण लक्ष्य — चित्त-वृत्ति-निरोध तथा स्वरूप-प्रतिष्ठा — के रूप में निरूपित होता है।

द्वितीय

स्वास्थ्य — सहज उपलक्ष्य

स्वास्थ्य योग का स्वाभाविक उपलक्ष्य है, साध्य नहीं। साधना के परिपाक के साथ वह स्वयं प्रकट होता है।

तृतीय

भारतीय दर्शन — स्वतंत्र प्रामाणिकता

सांख्य, योग, वेदान्त तथा अन्य परम्पराएँ अपनी स्वतंत्र प्रामाणिकता में। शास्त्र, ऋषि-वचन तथा अनुभव स्वयं प्रमाण हैं।


प्रथम भाग

ग्रीष्म ऋतु अनुकूल साधना


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कृष्ण कृपा – 4, सुभाष नगर, साइंस पार्क के पीछे, शास्त्री नगर, जयपुर, राजस्थान — 302016, भारत
दूरभाष : +91- 966 4271 525
ईमेल : yog.anandam.patrika@gmail.com